उम्मीदों की बारिश 

यूं टकटकी लगाए देख रहा है
वह किसान आसमान को,
शायद पुनर्जीवित करना चाहे
वह अपने बागान को !

                           आंखों में उम्मीदें हैं
                           मन में अनेकों सपने,
                           शायद फिर से हरा-भरा करना चाहे
                           वह अपने इन बागान को !

यह मेघ भी बड़े अभिमानी है
ले रहे हैं उस गरीब के इम्तिहान को,
ना जाने कब बरस कर
हरा-भरा करेंगे उसके बागान को !

                           यू गरज कर ये मेघ
                           तोड़ रहे हैं सब्र उस गरीब का,
                           आ चुका है वक्त
                           उसके नसीब का !

भर ली है हुंकार आसमान ने
उस किसान की आंखों में चमक आई है,
शायद ये पानी की बूंदे
उसके जीवन में खुशहाली लाई है !

उड़ान..(UDAAN).

उसकी आजादी कहां बंद है
कुछ तो उसका मन कहता है,
ना जाने क्यों वह आजकल
अपनी ही धुन में खोया-खोया रहता है!

                                जिम्मेवारियों के बोझ ने
                                उसकी मुस्कुराहट चुराई है,
                                हर वक्त उसके चेहरे पर
                                अजब सी उदासी छाई है!

अपने सपने भूल गया
निकल पड़ा गलत राह में,
खुशियां अपनी भूल गया
चंद पैसे कमाने की चाह में!

                                  यह कोई और नहीं
                                  यह तो तुम हो,
                                  अपने सपनों को छोड़कर
                                  दुनिया की भाग-दौड़ में गुम हो!

तोड़ दो ये सारे बंधन
भर दो खुशियों के बागान,
छोड़ दो यह दुनिया-दारी
भर लो अपने “सपनों की उड़ान”!

The biggest adventure you can take is to live the life of your dreams.

अकेला राही

सारे अपने रूठ गए

रिश्ते सारे टूट गए,

अकेला ही चल रहा हूँ इस राह में  

   साथी सारे छूठ गए |

    ना जाने कहां ले जाएगें ये कदम मुझे  

  कोस रहा हूँ ऐे किस्मत तुझे, 

  डरता नहीं हूँ जीवन की कठिनाइओं से   

  चाहे मौत ही मार दे मुझे l

थक गया हूँ पत्थर की मूर्ति से मांगकर भिक्षा  

 हर मोड़ पर वक्त ले रहा है परीक्षा,

  फिर भी इस राह पर चलता जा रहा हूँ  

चाहे अपने सभी मोड दे मुंह l

मान लिया ऐ दुनिया, है मेरा वक्त बुरा 

   अपनों ने ही पीठ पर घोप दिया छुरा,

 फिर भी न मैं इस राह में ठहरा  

 चाहे घाव हो जितना भी गहरा l

उम्मीद है मुझे, कि अच्छे दिन लौट आएंगे  

सभी रूठे मान जाएंगे,

 थूक देगें  सभी दुश्मन भी जहर  

 लौट आएगी जीवन में खुशियोंं की लहर l